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Spinal Muscular Atrophy: स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी क्या है, क्या16 करोड़ रुपये से बच पाएगी इस मासूम की जिंदगी
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Spinal Muscular Atrophy: स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी क्या है, क्या 16 करोड़ रुपये से बच पाएगी इस मासूम की जिंदगी

Spinal Muscular Atrophy स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी क्या है?

स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी (SMA) का अर्थ वंशानुगत तंत्रिका-पेशी रोगों के एक ऐसे समूह से है जो तंत्रिका कोशिकाओं (गतिक तंत्रिका कोशिकाओं/मोटर न्यूरॉन) को और ऐच्छिक पेशियों के नियंत्रण को प्रभावित करता है।SMA, जो नवजात शिशुओं और घुटनों के बल चलने वाले शिशुओं में मृत्यु का अग्रणी आनुवंशिक कारण है, मस्तिष्क के आधार और रीढ़ की हड्डी में गतिक तंत्रिका कोशिकाओं (मोटर न्यूरॉन) को विखंडित कर देता है, जिसके कारण वे मांसपेशियों के सामान्य कार्य हेतु आवश्यक संकेत प्रदान नहीं कर पाती हैं।अनैच्छिक मांसपेशियां, जैसे मूत्राशय और आंतों व मलाशय के कार्य को नियंत्रित करने वाली मांसपेशियां, SMA में प्रभावित नहीं होती हैं। सुनने और देखने की क्षमता प्रभावित नहीं होती है, और बुद्धिमत्ता सामान्य या औसत से अधिक होती है।

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Spinal Muscular Atrophy: स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी क्या है, क्या16 करोड़ रुपये से बच पाएगी इस मासूम की जिंदगी
Spinal Muscular Atrophy
SMA टाइप – 1 नाम की दूर्लभ बीमारी से पीड़ित 8 महीने के मासूम अन्मय को तमाम लोगों की तरफ से मदद मिल रही है. इस बीमारी का टीका 16 करोड़ का है, जो सिर्फ अमेरिका में उपलब्ध है. आज हम आपको यूपी के सुल्तानपुर के अन्मय की कहानी बताएंगे. जिसे जानकर शायद आपकी आंखों में आंसू आ जाएंगे. स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफ़ी टाइप – 1 यानी ( SMA टाइप- 1) नाम की एक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित सुल्तानपुर के अन्मय को लोगों की दुआओं और मदद की जरूरत है.
बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद ने भी लोगों से मदद की अपील की है.
आमतौर पर नवजात बच्चे 6-7 महीने में खुद बैठना और 6-10 महीने में घुटने के बल चलना सीख जाते हैं. लेकिन फरवरी 2022 को जन्मा अन्मय 8 महीने का होने के बाद भी ऐसा नहीं कर पाता है. अन्मय को वो बीमारी (SMA) है, जो करीब 10 हजार में से किसी एक बच्चे को ही होती है. जब अन्मय का जन्म हुआ, उस समय अन्मय के इस बीमारी से पीड़ित होने की जानकारी न तो उसके माता-पिता को थी और न ही डॉक्टरों को. लेकिन जब अन्मय 3 महीने का हुआ, तब वह दूसरे बच्चों की तरह ठीक से हाथ-पैर नहीं हिला पाता था.
इसके साथ ही इस मासूम की त्वचा और हड्डियां भी कमजोर होने लगीं थीं. पहले अन्मय के परिवार को लगा कि ऐसा नॉर्मली होता है. लेकिन जब अन्मय की मां और पिता को पता चला कि उनके बच्चे को SMA बीमारी है, जिसका टीका 16 करोड़ का है. इसके ना लगने पर उसकी जान भी जा सकती है तो वो टूट गए.
कई स्टडिज़ और मेडिकल एक्सपर्ट्स का ऐसा मानना है कि यह एक जेनेटिक बीमारी है. इस बीमारी में शरीर में प्रोटीन बनाने वाला जीन नहीं होता. इस वजह से शरीर के हिस्सों में प्रोटीन नहीं पहुंच पाता. साथ ही दिमाग का शरीर की मांसपेशियों पर नियंत्रण नहीं रह जाता. इसे ही स्पाइनल मस्क्यूलर एंट्रॉफी टाइप – 2 कहा जाता है.
IMA के पूर्व सदस्य और पीडियाट्रिक डॉक्टर सुनील सिंघल ने इस बारे में जानकारी दी. जिसमें उन्होंने बताया, SMA जैसी दुर्लभ बीमारी का zolgensma नामक टीका अमेरीका बना चुका है.
Spinal Muscular Atrophy
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SMA के प्रकार

SMA के तीन प्रमुख, बचपन में शुरु होने वाले रूपों को अब आमतौर पर टाइप 1, टाइप 2, और टाइप 3 कहा जाता है। तीनों प्रकारों को ऑटोसोमल रिसेसिव SMA भी कहा जाता है, अर्थात बच्चों में यह रोग आने के लिए आवश्यक है कि उन्हें माता व पिता, दोनों से ही दोषपूर्ण जीन प्राप्त हो।

SMA के सभी रूप धड़, बांहों व पैरों की कंकालीय मांसपेशियों को प्रभावित करते हैं। सामान्यतः जो मांसपेशियां शरीर के मध्य भाग के अधिक समीप होती हैं वे दूर वाली मांसपेशियों की तुलना में अधिक प्रभावित होती हैं।

SMA टाइप 1, जो सबसे गंभीर रूप है, अधिकांशतः मुंह और गले की मांसपेशियों का नियंत्रण करने वाली तंत्रिकाओं को प्रभावित करता है, और इसलिए इसमें चबाने और निगलने से संबंधित समस्याएं अधिक होती हैं। रोग के सभी प्रकारों में श्वसन पेशियां अलग-अलग स्तर तक शामिल रहती हैं। SMA टाइप 1 में रोग का आरंभ बच्चे के जीवन के आरंभिक छः महीनों के अंदर दिखने लगता है। SMA टाइप 1 से पीड़ित बच्चे सहारे के बिना बैठ नहीं पाते हैं, और आमतौर पर दो वर्ष का होने से पहले उनकी मृत्यु हो जाती है।

SMA टाइप 2 रोग का एक मध्यवर्ती रूप है। इसका आरंभ सात से अठारह माह के बीच होता है। SMA टाइप 2 से पीड़ित बच्चे आमतौर पर सहारे के बिना बैठना सीख लेते हैं, पर वे सहायता के बिना खड़े होना या चलना नहीं सीख पाते हैं। बच्चे का जीवित रहना मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करता है कि उसे सांस लेने और निगलने में किस स्तर की कठिनाई होती है।

SMA टाइप 3 इस स्थिति का एक अपेक्षाकृत हल्का रूप है। इसका आरंभ अठारह माह की आयु के बाद, और सबसे अधिक पांच से पंद्रह वर्ष की आयु के बीच होता है। चबाने और निगलने की मांसपेशियों की कमज़ोरी दुर्लभ ही होती है, और श्वसन संबंधी प्रभाव इतने गंभीर नहीं होते जितने पहले दो रूपों में होते हैं। ये बच्चे वयस्कावस्था तक पहुंचने में सफल हो सकते हैं। श्वसन संबंधी जटिलताएं, यदि वे हों तो, जीवन के लिए सबसे गंभीर ख़तरा पैदा करती हैं।

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उपचार

इस समय SMA को रोक या पलट सकने वाला कोई उपचार ज्ञात नहीं है। शारीरिक चिकित्सा और ऑर्थोपेडिक यंत्र चलने की कार्यक्षमता कायम रखने में सहायता कर सकते हैं। ब्रेस या सर्जरी से भी स्कोलियोसिस, यानि मेरु दंड के वक्रित होने का प्रतिकार करने में मदद मिल सकती है।

दुनिया भर के शोधकर्ता SMA के कारण ढूंढने के लिए मिल-जुलकर कार्य कर रहे हैं; इस रोग के अधिकांश मामले SMN (सरवाइवल ऑफ़ मोटर न्यूरॉन) नामक प्रोटीन की कमी से होते हैं। यह कमी तब होती है जब SMN1 जीन की दोनों प्रतियों – प्रत्येक गुणसूत्र 5 पर एक प्रति – में एक उत्परिवर्तन मौजूद होता है।

वैज्ञानिक जीनों के अभिलक्षण पहचानने, जीन कार्य और रोग क्रम का अध्ययन करने, और इन रोगों की रोकथाम करने, इनका उपचार करने, और अंततः इन्हें पूरी तरह ठीक करने के तरीके मिलने की आशा कर रहे हैं।

 

By Nishant