Sun. Dec 4th, 2022
UPA के 32 विधायक रांची से रायपुर एयरलिफ्ट
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झारखंड में सियासी संकट के बीच UPA के विधायकों को रांची से रायपुर एयरलिफ्ट लाया गया है। कांग्रेस-जेएमएम और राजद के 32 विधायक रांची से रायपुर के लिए एयरलिफ्ट हो चुके हैं। सीएम हाउस से 2 बस में सवार होकर सभी रांची एयरपोर्ट पहुंचे थे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद बस में विधायकों के साथ गए। यहां से सभी इंडिगो की फ्लाइट से रायपुर के लिए निकल गए। वहां दो दिनों के लिए रिसॉर्ट में बुकिंग की गई है।

विधायकों को रायपुर भेजकर सीएम अपने आवास के लिए निकल गए। इस दौरान हेमंत सोरेन ने मीडिया से कोई बात नहीं की।

बता दें कि दो दिन के सियासी शांति के बाद आज दोपहर साढ़े 12 बजे से यूपीए के विधायक और मंत्री सामान के साथ CM हाउस पहुंचने लगे। तकरीबन 3 बजे विधायकों का सामान लेकर CM हाउस से तीन गाड़ियां निकली। इस दौरान सीएम हाउस से एयरपोर्ट तक हलचल तेज रही। रांची एयरपोर्ट पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम दिखे। बड़ी संख्या में जवानों की तैनाती की गई थी।

उधर रायपुर एयरपोर्ट पर भी विधायकों के पहुंचने को लेकर तैयारियां की गई हैं। एयरपोर्ट पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। बैरिकेडिंग की गई है। विधायकों को एयरपोर्ट से बसों के जरिए नवा रायपुर के मेफेयर रिसॉर्ट ले जाया जाएगा। शाम साढ़े 5 बजे तक विधायकों के रायपुर पहुंचने की खबर है। बताया जा रहा है कि रिसॉर्ट में 30-31 अगस्त की बुकिंग की गई है।

32 UPA MLAs Airlift Ranchi to Raipur

झारखंड में सियासी संकट के बीच यूपीए के 32 विधायकों को एयरलिफ्ट किया जा रहा है। इनमें कांग्रेस से 12, JMM के19 और राजद के 1 विधायक शामिल हैं। इसके अलावा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर, प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे और संतोष पांडे रायपुर जा रहे हैं.

रांची एयरपोर्ट पर विधायकों का सामान लेकर जाते इंडिगो के कर्मचारी।
रांची एयरपोर्ट पर विधायकों का सामान लेकर जाते इंडिगो के कर्मचारी।

इधर, बीजेपी विधायक दल-बदल मामले में बाबूलाल मरांडी पर विधानसभा में सुनवाई पूरी हो गई है। किसी भी वक्त उनपर फैसला आ सकता है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री सोरेन पर फैसले के बाद ही इसपर कुछ फैसला आ सकता है।

दल-बदल मामले में बाबूलाल मरांडी पर सुनवाई पूरी

दल-बदल मामले में मरांडी पर सुनवाई पूरी हो गई है। इसपर किसी भी वक्त भी फैसला आ सकता है। दरअसल बाबूलाल मरांडी पर झाविमो (झारखंड विकास मोर्चा) के सिंबल पर विधानसभा चुनाव 2019 में निर्वाचित होने के बाद भाजपा में शामिल हो गए। मरांडी ने कहा कि उन्होंने झाविमो का विलय भाजपा में नियमानुसार किया है। तीन विधायकों में से दो को निष्कासित करने के बाद पार्टी में बचे एक मात्र विधायक ने पार्टी का विलय करने का निर्णय किया। यह दल-बदल का मामला नहीं बनता है। झाविमो में भाजपा के विलय को निर्वाचन आयोग की मंजूरी भी मिल चुकी है।

इसी विमान से रांची से रायपुर भेजे जाएंगे विधायक।
इसी विमान से रांची से रायपुर भेजे जाएंगे विधायक।

इससे पहले CM हाउस पहुंचे हेल्थ मिनिस्टर बन्ना गुप्ता ने कहा कि सरकार को गिराने की साजिश रची जा रही है। भाजपा काला अध्याय लिखने का काम कर रही है। बीजेपी के पास कोई मुद्दा नहीं है। हम बहुत मजबूत हैं और एकजुट हैं।

रायपुर के मेफेयर लेक रिसॉर्ट में विधायकों के ठहरने की व्यवस्था की गई है।
रायपुर के मेफेयर लेक रिसॉर्ट में विधायकों के ठहरने की व्यवस्था की गई है।

सोरेन ने 1 सितंबर को कैबिनेट की बैठक बुलाई

इधर सियासी संकट के बीच CM हेमंत सोरेन ने 1 सितंबर को कैबिनेट की बैठक बुलाई है। इसमें जनता के हित से जुड़े कई अहम फैसले लेने संबंधी बातें कही जा रही है। वहीं विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से आज BJP के विधायक दल के नेता बाबू लाल मरांडी की विधायकी से संबंधी फैसले भी आने वाला है।

दो दिनों से शांत पड़ी झारखंड की सियासत में एक बार फिर से हलचल शुरू हो गई है। इस बीच सोमवार को CM हेमंत सोरेन के भाई बसंत सोरेन की विधायकी पर भी चुनाव आयोग में चर्चा हुई, लेकिन इस पर कोई निर्णय नहीं हो सका।

चुनाव आयोग को राज‌‌भवन के पत्र का इंतजार

चुनाव आयोग के एक बड़े पदाधिकारी की मानें तो गेंद अभी भी राजभवन के पाले में हैं। चुनाव आयोग ने पहले ही मामले की पूरी जांच-पड़ताल के बाद अपना निर्णय सुना दिया है। आदेश राज्यपाल को जारी करना है। राजभवन के निर्देश के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। राजभवन इस संबंध में गैजेट जारी करेंगे, जिसे राज्य निर्वाचन आयोग विधानसभा स्पीकर को देगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

अब CM ने भी साधा राज्यपाल पर निशाना

चुनाव आयोग से आए निर्देश संबंधी सवाल पूछने पर CM हेमंत सोरेन ने राज्यपाल पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह तो राज्यपाल रमेश बैस ही बताएंगे। वे भी इंतजार कर रहे हैं। मौजूदा स्थिति के विषय में ज्यादा अच्छे से राजभवन ही बता पाएगा। CM ने कहा कि वह कुर्सी से दिल्लगी नहीं करते। वे राज्य के सवा तीन करोड़ लोग, आदिवासी, दलित, पिछड़े, गरीब, मजदूरों से दिल्लगी करते हैं।

CM रिलैक्स दिखने की कर रहे हैं कोशिश, कहा- चिंता की कोई बात नहीं

CM हेमंत सोरेन ने कहा कि चिंता की कोई बात नहीं। नकदी के साथ कोलकाता में गिरफ्तार किए गए कांग्रेस के तीन विधायकों का संदर्भ देते हुए विधायकों की खरीद-फरोख्त के सवाल पर उन्होंने कहा- तीनों विधायकों की गिरफ्तारी की वजह जांच का विषय है। कुछ ऐसे हैं जो बिकने के लिए खड़े हो जाते हैं और कुछ नहीं बिकते। पकड़े जाने वाले मुसीबत में फंसते हैं। जो बच जाते हैं, उनकी बल्ले-बल्ले हो जाती है।

सोरेने की पत्नी का नाम सबसे आगे

अगर सोरेन की मुख्यमंत्री की कुर्सी जाती है तो इस पद के लिए सबसे पहला नाम सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन का है। दूसरे और तीसरे नंबर पर जोबा मांझी और चंपई सोरेन हैं। दोनों सोरेन परिवार के काफी करीबी और विश्वस्त हैं। कांग्रेस ने भी इन नामों पर अभी तक नहीं किसी तरह की आपत्ति नहीं जताई है।

क्या है खनन पट्टे का मामला?

10 फरवरी को पूर्व CM रघुवर दास के नेतृत्व में BJP के एक डेलिगेशन ने गवर्नर से मुलाकात की थी। BJP ने राज्यपाल से CM सोरेन की सदस्यता रद्द करने कि मांग की थी। BJP ने आरोप लगाया था कि CM सोरेन ने पद पर रहते हुए रांची के अनगड़ा में 88 डिसमिल पत्थर माइनिंग लीज लिया है। BJP का आरोप है कि यह लोक जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (RP) 1951 की धारा 9A का उल्लंघन है। गवर्नर ने BJP की यह शिकायत चुनाव आयोग को भेजी।

दल-बदल मामले में बाबूलाल मरांडी पर सुनवाई पूरी

दल-बदल मामले में मरांडी पर सुनवाई पूरी हो गई है। इसपर किसी भी वक्त भी फैसला आ सकता है। दरअसल बाबूलाल मरांडी पर झाविमो (झारखंड विकास मोर्चा) के सिंबल पर विधानसभा चुनाव 2019 में निर्वाचित होने के बाद भाजपा में शामिल हो गए। मरांडी ने कहा कि उन्होंने झाविमो का विलय भाजपा में नियमानुसार किया है। तीन विधायकों में से दो को निष्कासित करने के बाद पार्टी में बचे एक मात्र विधायक ने पार्टी का विलय करने का निर्णय किया। यह दल-बदल का मामला नहीं बनता है। झाविमो में भाजपा के विलय को निर्वाचन आयोग की मंजूरी भी मिल चुकी है।

जबकि शिकायतकर्ता विधायक दीपिका पांडेय सिंह और प्रदीप यादव की तरफ से कहा गया कि झाविमो का भाजपा में दो तिहाई बहुमत से विलय नहीं हुआ है। यह दल-बदल का मामला बनता है।

बाबूलाल मरांडी बने पहले CM

15 नवंबर 2000 को झारखंड बनने के साथ ही BJP सरकार में बाबूलाल मरांडी ने पहली बार राज्य की कमान संभाली और झारखंड के पहले CM बने। हालांकि वे अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। उन्होंने आंतरिक विरोध के कारण मुख्यमंत्री का पद छोड़ना पड़ा।

झारखंड बनने के 22 सालों में 11 सीएम बदल चुके हैं। इनमें मौजूदा सीएम हेमंत सोरेन के पिता शिबू सोरेन सबसे कम 10 दिनों के लिए जबकि बीजेपी के रघुवर दास सबसे ज्यादा 5 सालों के लिए सीएम रहे। रघुवर दास झारखंड के एकमात्र मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया है।

By Nishant